क्या अरविंद केजरीवाल अपनी ही पार्टी के नेताओं की जासूसी करवाते थे?
केजरीवाल ने अपनी ही पार्टी के नेता कुमार विश्वास की जासूरी करवाने की कोशिश की। केजरीवाल की सरकार ने एक जासूसी कंपनी को पैसे दिए और उस कंपनी से अपनी पार्टी के कुछ नेताओं के कॉल डिटेल निकालने को कहा।
केजरीवाल ने अपनी ही पार्टी के नेता कुमार विश्वास की जासूरी करवाने की कोशिश की। केजरीवाल की सरकार ने एक जासूसी कंपनी को पैसे दिए और उस कंपनी से अपनी पार्टी के कुछ नेताओं के कॉल डिटेल निकालने को कहा।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बारे में एक बात जबरदस्त तरीके से फैली है, और इस बात के थोड़े सबूत भी मिलने लगे हैं । कुछ सबूत दस्तावेज में दर्ज हैं और कुछ सबूत मीडिया में सूत्रों के हवाले से फैले हैं। खबर ये है कि केजरीवाल को अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं पर भरोसा नहीं है।
केजरीवाल ने अपनी ही पार्टी के नेता कुमार विश्वास की जासूरी करवाने की कोशिश की। केजरीवाल की सरकार ने एक जासूसी कंपनी को पैसे दिए और उस कंपनी से अपनी पार्टी के कुछ नेताओं के कॉल डिटेल निकालने को कहा। मीडिया में खबर उड़ी है कि कुमार विश्वास की जासूसी सबसे ज्यादा हुई क्योंकि केजरीवाल को शक था कि कुमार विश्वास भाजपा नेताओं के संपर्क में हैं। केजरीवाल सरकार ने सिर्फ कुमार विश्वास की ही जासूसी नहीं करवाई, जब नजीब जंग दिल्ली में उपराज्यपाल थे उस वक्त उनकी जासूसी की भी कोशिश हुई। दिल्ली सरकार के अफसरों के मोबाइल का ब्योरा निकालने की कोशिश हुई की वो कितनी बार, कितनी देर, किससे बात करते हैं। ये बात अब तक नहीं पता चली है कि जासूसी की ये कोशिश कहां तक सफल हुई। दरअसल शूंगलू कमिटी की रिपोर्ट में केजरीवाल सरकार की गड़बड़ियों का जिक्र है। एक गड़बड़ी हुई फीडबैक यूनिट के नाम पर।
सूत्रों के मुताबिक फीडबैक यूनिट की आड़ में सोनी डिटेक्विट एलाइट सर्विसेज से करार किया गया। कहने के लिए इस कंपनी को स्वास्थ्य और लोक निर्माण विभाग के लिए कुछ पेशेवर लोगों को नौकरी देने के लिए चुना गया था। लेकिन असलियत में ये कंपनी एक डिटेक्टिव एजेंसी है। इस कंपनी ने ऐसे 17 लोगों को चुना जो आम आदमी पार्टी के समर्थक हैं और पक्के केजरीवाल भक्त माने जाते थे। इस काम के लिए 3 करोड़ 83 लाख फंड दिया गया। पैसा मिलने के बाद अब असली काम शुरू हुआ।
68 गाडियां, 4 कंप्यूटर, 70 मोबाइल खरीदे गए। 5 लैपटॉप, 75 कंप्यूटर भी लगाए गए। बिना उपराज्यपाल की इजाजत के ये काम शुरू हुआ। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ये तैयारी उनके लिए थी जिनपर केजरीवाल को शक था। लेकिन मामला खुल गया, अब केजरीवाल के कुछ अपने ही बागी बनने की तैयारी कर रहे हैं। लगता है केजरीवाल जासूस भी बन सकते थे, अगर मुख्यमंत्री नहीं बनते।



